विश्व चौराहे पर खड़ा भारत करेगा विश्व का मार्गदर्शन: भैयाजी जोशी, तीन दिवसीय गौ संचालक बैठक का हुआ समापन, गौसंरक्षण, प्राकृतिक खेती और पंचगव्य पर हुआ मंथन।
संवाददाता हरिपाल सिंह
मथुरा/परखम। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय गौसेवा गतिविधि द्वारा देशभर के प्रमुख गौशाला संचालकों एवं गौसेवा कार्यकर्ताओं की तीन दिवसीय बैठक का रविवार को दीनदयाल गौ विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, गौग्राम परखम में समापन हुआ। समापन कार्यक्रम का शुभारंभ अग्निहोत्र एवं गौपूजन के साथ किया गया। बैठक में देश के विभिन्न प्रांतों एवं क्षेत्रों से पहुंचे करीब 650 गौशाला संचालकों ने सहभागिता की।समापन सत्र में विभिन्न प्रांतों से आए गौशाला संचालकों ने अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए। इस दौरान गौशालाओं के बेहतर संचालन, संरक्षण एवं व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। विभिन्न क्षेत्रों से आए वैज्ञानिकों ने आदर्श गौपालन, गौसंरक्षण एवं गौसंवर्धन सहित अन्य विषयों पर प्रस्तुतियां दीं। बैठक में पंचगव्य की उपयोगिता, प्राकृतिक खेती, भूमि सुधार तथा गौआधारित उत्पादों के निर्माण और उपयोग जैसे विषयों पर भी विस्तृत मंथन हुआ।कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने विभिन्न राज्यों से आए गौशाला संचालकों, क्षेत्र एवं प्रांत संयोजकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने गौसेवा और गौसंरक्षण के कार्यों को समाज में व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल अपने लिए नहीं, बल्कि विश्व कल्याण के लिए कार्य करने वाला देश है। भारत शाश्वत, समग्र और सर्वकालिक है।भैयाजी जोशी ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा और धर्म की समझ विश्व के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर संतों और साधु-संतों ने समाज को दिशा दी है, जिसके कारण भारत की सांस्कृतिक परंपरा निरंतर आगे बढ़ी। उन्होंने कहा कि देश के सामने समाज परिवर्तन का लक्ष्य कठिन जरूर है, लेकिन भारत के समाज में इसके लिए पर्याप्त सामर्थ्य है।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व कठिन दौर से गुजर रहा है और ऐसे समय में भारत विश्व का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखता है। भारत का संकल्प समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का है।कार्यक्रम की अध्यक्षता अक्षय पात्र वृंदावन के अध्यक्ष स्वामी अनंत वीर दास जी ने की। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में गौसेवा धैर्य और समर्पण का कार्य है। सनातन संस्कृति में गौ को माता का दर्जा दिया गया है। इस प्रकार की बैठकें युवा पीढ़ी को गौसेवा, समाजसेवा और संस्कृति के प्रति प्रेरित करने का कार्य करती हैं। उन्होंने आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं को साधुवाद दिया।बैठक में श्री अजीत महापात्र, अखिल भारतीय गौसेवा संयोजक, श्री शंकरलाल जी, श्री नवल किशोर जी, श्री के.ए.एन. राघवन जी, श्री महेंद्र जी क्षेत्र प्रचारक, श्री धर्मेंद्र जी प्रांत प्रचारक ब्रज प्रांत, हरिशंकर शर्मा जी क्षेत्र संयोजक गौसेवा गतिविधि एवं मंत्री दीनदयाल कामधेनु गौशाला समिति, मनोज जी प्रांत संयोजक गौसेवा गतिविधि ब्रज प्रांत, सोनपाल जी निदेशक दीनदयाल धाम सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।वहीं सर्वव्यवस्था प्रमुख जगदीश जी, अवधेश जी, नत्थीलाल जी, उमेश शर्मा, डॉ. अनुराग शर्मा, विनोद जी, नरेंद्र जी, राम पाठक जी, बृजेश जी, ऋषभ, देवेंद्र प्रताप, संजय शर्मा जी, शशिकांत जी एवं गोविंद सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया। बैठक के दौरान देशभर से आए गौशाला संचालकों एवं कार्यकर्ताओं ने गौसेवा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने अनुभव साझा किए।


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