मथुरा के बाजना में सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाकर धड़ल्ले से लग रही पशु पैंठ, लम्पी स्किन डिजीज के खतरे के बीच प्रशासन बेखबर।
संवाददाता खुशांत गुप्ता
बाजना (मथुरा)।प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत में कितना फर्क होता है, इसका जीता-जागता उदाहरण बाजना क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। जनपद मथुरा में गौवंश और अन्य मवेशियों में खतरनाक ‘लम्पी स्किन डिजीज’ (Lumpy Skin Disease) के संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन ने भले ही कागजों पर पशु मेलों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया हो, लेकिन बाजना में यह प्रतिबंध पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है। यहां खुलेआम सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए पशु पैंठ लगाई जा रही है।सरकारी आदेशों को ठेंगा, जुटे सैकड़ों पशु और व्यापारीप्राप्त तस्वीरों और स्थानीय इनपुट के अनुसार, बाजना के इस पशु बाजार में बाकायदा टेंट और तिरपाल लगाकर सैकड़ों की संख्या में भैंसें और अन्य दुधारू पशु लाए जा रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग या किसी भी प्रकार के सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना व्यापारी और पशुपालक भीड़ लगाकर पशुओं की खरीद-फरोख्त में जुटे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब मुख्य पशुचिकित्साधिकारी मथुरा (डॉ. नरेन्द्र नारायण शुक्ला) के उस सख्त आदेश के बाद हो रहा है, जिसमें उन्होंने तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेशों तक जिले की सभी पशु पैंठों को बंद रखने का निर्देश दिया था।सीमावर्ती इलाकों से संक्रमण फैलने की बड़ी आशंकामुख्य पशुचिकित्साधिकारी के आदेश (पत्रांक 1289/प्रतिबन्ध/2026-27) में साफ तौर पर आगाह किया गया था कि मथुरा में लम्पी स्किन डिजीज के छिटपुट संक्रमण की सूचनाएं मिल रही हैं। बीमारी को स्थानीय स्तर पर रोकने और पड़ोसी जिलों या राज्यों की सीमाओं से आने वाले मवेशियों के जरिए फैलने वाले संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए ही पशु मेलों को बंद करना अनिवार्य किया गया था। लेकिन बाजना में लग रही इस अवैध पैंठ में बाहरी क्षेत्रों से भी मवेशी आ रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र के शांत पशुधन पर लम्पी वायरस का गंभीर खतरा मंडराने लगा है।जिम्मेदार मौन, जनता में आक्रोशप्रतिबंध के बावजूद इस तरह खुलेआम बाजार सजना स्थानीय पुलिस और पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस बाजार के कारण क्षेत्र में लम्पी वायरस फैला, तो सैकड़ों गरीब किसानों के दुधारू पशु इसकी चपेट में आ जाएंगे और उनका भारी नुकसान होगा। आखिर प्रशासन की नाक के नीचे इतनी बड़ी लापरवाही कैसे चल रही है और जिम्मेदार अधिकारी इस पर आंखें क्यों मूंदे बैठे हैं?



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