प्रेम का भवसागर हैं श्रीकृष्ण : संत निर्मलदासश्रीमद्भागवत कथा में कृष्ण जन्मोत्सव एवं गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन।
संवाददाता प्रिंस कुमार सोनी
राया। श्री राधारानी मानसरोवर धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास संत निर्मलदास महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य जन्म लीलाओं एवं गोवर्धन लीला का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए और पूरा पंडाल “राधे-राधे” व “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।कथा व्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण प्रेम के भवसागर हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा में अवतरण, वासुदेव द्वारा उन्हें यमुना पार कर गोकुल पहुंचाने तथा नंद बाबा के यहां मनाए गए नंदोत्सव का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान का प्रत्येक अवतार धर्म की स्थापना और भक्तों के कल्याण के लिए होता है।गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए संत निर्मलदास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान का नाश करने के लिए अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर सात दिनों तक ब्रजवासियों की रक्षा की। यह लीला हमें अहंकार त्यागकर ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखने की प्रेरणा देती है।कथा के उपरांत श्री राधारानी सेवा समिति राया के संस्थापक पवन गोयल एडवोकेट एवं पवन अग्रवाल ने संत निर्मलदास का माला और अंगवस्त्र पहनाकर तथा मानसरोवर धाम की सुंदर छवि भेंट कर सम्मान किया।इस अवसर पर रोहित मिश्रा, मुन्नू शुक्ला, धनेश गौड़, आचार्य विवेक, कपिल शर्मा, गोविंद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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