12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर 45 दिवसीय बुनकर प्रशिक्षण का शुभारंभ।
समर्थ’ योजना के तहत 30 महिलाओं को मिलेगा निःशुल्क प्रशिक्षण, प्रतिदिन ₹300 मानदेय और प्रशिक्षण के बाद करघा।
संवाददाता हरिपाल सिंह
मथुरा। 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस-2026 के अवसर पर भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय, बुनकर सेवा केंद्र मेरठ एवं दीनदयाल बुनकर केंद्र, गऊ ग्राम परखम के संयुक्त तत्वावधान में ‘समर्थ’ योजना के अंतर्गत 45 दिवसीय हथकरघा बुनाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ शनिवार को अशोक सिंघल हॉल, गऊ ग्राम परखम में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना तथा हथकरघा उद्योग को नई पहचान दिलाना है।मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा देश की सांस्कृतिक धरोहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘समर्थ’ योजना महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगी।मुख्य वक्ता अजीत महापात्रा ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती पारंपरिक कुटीर उद्योगों से जुड़ी है। यदि गांवों की महिलाएं हथकरघा उत्पादन से जुड़ेंगी तो उनकी आय बढ़ेगी और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।विशिष्ट अतिथि वीरेंद्र सेमवाल ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता और विपणन से जोड़कर बुनकरों को नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।वस्त्र मंत्रालय के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपनिदेशक तपन शर्मा ने कहा कि विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय की योजनाओं का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को कौशल विकास से जोड़ना है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से पूरी लगन के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने का आह्वान किया।बुनकर प्रशिक्षण केंद्र के उपाध्यक्ष दीपक अग्रवाल ने बताया कि 45 दिवसीय प्रशिक्षण में 30 महिलाओं को हथकरघा बुनाई का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक प्रतिभागी को प्रतिदिन ₹300 मानदेय मिलेगा। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर परीक्षा आयोजित होगी तथा सफल प्रतिभागियों को लगभग ₹30 हजार मूल्य का करघा उपलब्ध कराया जाएगा, जिस पर निर्धारित सरकारी अनुदान का लाभ भी दिया जाएगा।उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के मुख्य प्रशिक्षक मोदा राम (राजस्थान) हैं, जबकि सहायक प्रशिक्षक भभूता राम एवं महेंद्र प्रशिक्षण देंगे।कार्यक्रम में नितिन बहल ने बताया कि प्रशिक्षण में 17 गांवों की महिलाएं भाग ले रही हैं, जबकि हरिशंकर शर्मा ने कहा कि परखम क्षेत्र के लगभग 52 गांवों में कभी हथकरघा बुनाई हर घर की पहचान थी।संस्था का उद्देश्य इस गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करना है। भविष्य में प्रत्येक घर तक करघा उपलब्ध कराने, कच्चा माल उपलब्ध कराने तथा तैयार उत्पादों की मार्केटिंग की व्यवस्था भी संस्था द्वारा की जाएगी।कार्यक्रम में प्रशिक्षणार्थियों को आधुनिक हथकरघा तकनीक, स्वरोजगार के अवसर, भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई तथा टूल किट भी वितरित की गई।कार्यक्रम का संचालन अजय वर्मा ने किया।इस अवसर पर सोनपाल, राहुल गोयल, अर्पित महेश्वरी, उदित बंसल, शशिकांत, राम पाठक, किशन, अशोक, रामवीर फौजदार, महिपाल सिंह, पारस, राजदर्शन, राजेंद्र प्रधान, गोविन्द, हरिनारायण, हरेंद्र, गौरी, जगन प्रधान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।



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